19 अक्टूबर 2026 के अनुसार अगली एकादशी पापांकुशा एकादशी है, जो गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को है। यह उसी व्रत का तिथि-विशेष लेख है; अपने आप बदलने वाला “अगली एकादशी” कैलेंडर नहीं है।
एकादशी और पारण का समय
- व्रत और पूजा: गुरुवार, 22 अक्टूबर।
- एकादशी आरंभ: 21 अक्टूबर दोपहर 2:11 बजे।
- एकादशी समाप्ति: 22 अक्टूबर दोपहर 2:47 बजे।
- पारण: शुक्रवार, 23 अक्टूबर, नई दिल्ली में सुबह 6:27 से 8:42 बजे IST।
- द्वादशी समाप्ति: 23 अक्टूबर दोपहर 2:35 बजे।
पारण अगले दिन व्रत खोलने का समय है। सुबह की पारण अवधि और द्वादशी समाप्त होने का समय अलग बातें हैं। किसी विशेष वैष्णव या मंदिर परंपरा का पालन करने वाले उसकी समय-सूची भी देखें।
पापांकुशा एकादशी का भाव
यह व्रत भगवान विष्णु, विशेषकर पद्मनाभ स्वरूप की उपासना से जुड़ा है। इसके माहात्म्य की पारंपरिक कथाओं में श्रीकृष्ण के संवाद मिलते हैं। करुणा, संयम, दान और हिंसा से दूर होने का विचार परिवार के साथ समझा जा सकता है।
क्रोधन और अंगिरा ऋषि की प्रचलित कथा
एक लोकप्रचलित कथा में क्रोधन नामक शिकारी अपने किए अनिष्ट और निकट आती मृत्यु से भयभीत होता है। वह अंगिरा ऋषि की शरण लेता है। ऋषि उसे एकादशी का आचरण और विष्णु उपासना बताते हैं। पश्चात्ताप से उसकी दृष्टि बदलती है और कथा के अंत में दिव्य दूत उसे लेने आते हैं। इसका भाव क्रूरता छोड़कर नया मार्ग अपनाने की संभावना है। संस्करण और ग्रंथ-संबंधी दावे अलग मिलते हैं, इसलिए इसे किसी एक पुराण का प्रमाणित उद्धरण नहीं बताया गया है।
व्रत का सरल आचरण
- स्वच्छ स्थान पर परिचित प्रार्थना से विष्णुजी का स्मरण करें।
- कथा पढ़ें या किसी दयापूर्ण कार्य पर विचार करें।
- भोजन और उपवास की पद्धति अपनी परंपरा व स्वास्थ्य के अनुसार चुनें।
- यथाशक्ति उपयोगी दान करें; इसे निश्चित फल के लेन-देन की तरह न समझें।
- अगली सुबह पारण के लिए अपने शहर का सही समय पहले देख लें।
सामान्य प्रश्न
तिथि 21 अक्टूबर को शुरू है, तो व्रत 22 को क्यों?
तिथि का आरंभ अपने आप व्रत की अंग्रेजी तारीख नहीं बन जाता। अपनी परंपरा के पंचांग में बताई व्रत-तिथि मानें।
क्या 22 अक्टूबर के बाद भी इसे अगली एकादशी मानें?
नहीं। लेख विशेष रूप से 22 अक्टूबर 2026 के लिए है। इसके बाद की तारीख के लिए नया शहर-विशेष कैलेंडर देखें।
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स्रोत और तिथि-जांच
तिथि और समय की जांच: 19 अक्टूबर 2026। सभी समय नई दिल्ली, भारत, IST के हैं। दूसरे शहर के लिए स्रोत में अपना शहर चुनें; केवल समय-अंतर जोड़ना पर्याप्त नहीं है। कथा का यह संक्षिप्त पुनर्कथन है; स्थानीय परंपराओं में भिन्नता हो सकती है।